∆सोचते है सीख ले हम भी बेरुखी करना सब से,
सब को महोब्बत देते देते हमने अपनी क़दर खो दी है।
∆छीन कर हाथो से सिगरेट वो कुछ इस अंदाज़ में बोली,
कमी क्या है इन होठों में जो तुम सिगरेट पीते हो।
∆कुछ दोस्त सीधे सादे भी अच्छे नहीं लगते.. और कुछ कमीने जान से भी प्यारे होते हैं..
∆वक्त ही नहीं मिलता दु:खी होने का.. क्योंकि उम्मीद ही नहीं करता मैं ज्यादा खुशी की..
∆बेगुनाह कोई नहीं, राज़ सबके होते हैं,
किसी के छुप जाते हैं, किसी के छप जाते हैं |
∆ज़िन्दगी की हक़ीक़त बस इतनी सी हैं,
की इंसान पल भर में याद बन जाता हैं
सब को महोब्बत देते देते हमने अपनी क़दर खो दी है।
∆छीन कर हाथो से सिगरेट वो कुछ इस अंदाज़ में बोली,
कमी क्या है इन होठों में जो तुम सिगरेट पीते हो।
∆कुछ दोस्त सीधे सादे भी अच्छे नहीं लगते.. और कुछ कमीने जान से भी प्यारे होते हैं..
∆वक्त ही नहीं मिलता दु:खी होने का.. क्योंकि उम्मीद ही नहीं करता मैं ज्यादा खुशी की..
∆बेगुनाह कोई नहीं, राज़ सबके होते हैं,
किसी के छुप जाते हैं, किसी के छप जाते हैं |
∆ज़िन्दगी की हक़ीक़त बस इतनी सी हैं,
की इंसान पल भर में याद बन जाता हैं
Comments
Post a Comment